लोकरंग की आंच : सुभाष चन्द्र कुशवाहा

Subhash Chandra Kushwaha's literary works including stories and articles in Hindi which is focussed around social awareness and other issues regarding India.

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

लोकरंग की आंच : सुभाष चन्द्र कुशवाहा: फरी,फरुवाही या अहीरऊ और पंवरिया नृत्य

लोकरंग की आंच : सुभाष चन्द्र कुशवाहा: फरी,फरुवाही या अहीरऊ और पंवरिया नृत्य
Posted by सुभाष चन्द्र कुशवाहा at 8:33 am
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सुभाष चन्द्र कुशवाहा
लखनऊ, उत्तरप्रदेश, India
जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर, कुशीनगर उ०प्र० में जन्में हिन्दी के प्रमुख कथाकार- सुभाष चन्द्र कुशवाहा, लोकरंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष हैं। मुख्य रचनाएँ- :कविता सग्रह: आशा, कैद में जिंदगी, साहित्य सदन, इलाहाबाद १९९८, गांव हुए बेगाने अब, मेधा प्रकाशन, दिल्ली २००४, :कथा संग्रह: * हाकिम सराय का आखिरी आदमी, यात्री प्रकाशन, दिल्ली, २००३ * बुचड़खाना, शिल्पायन, दिल्ली, २००६ * कथा में गांव, संवाद प्रकाशन, मेरठ, २००६ * जातिदंश की कहानियां, सामयिक प्रकाशन, दिल्ली, २००९ * होशियारी खटक रही है, अंतिका प्रकाशन, दिल्ली, २०१० :लोकरंग: * लोकरंग-१, सहयात्रा प्रकाशऩ, दिल्ली, २००९ :संपादन कार्य: लोकरंग-1 - लोकसंस्कृतियों के निरूपण का विनम्र प्रयास. * कथा में गांव, संवाद प्रकाशन, मेरठ, २००६ * जातिदंश की कहानियां, सामयिक प्रकाशन, दिल्ली
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